WSS Statement On Making Movement Spaces Save For Women

STAND UP FOR THE REPEAL OF THE THREE FARM ACTS!!

STAND UP AGAINST PATRIARCHY!!

Public Statement by WSS

3MAY, 2021

Women against Sexual Violence and State Repression (WSS) stands firmly and unconditionally with survivors from various movement spaces, who have come forward with their testimonies of sexual assault, harassment and other forms of interpersonal violence on social media from Trolley Times, Swaraj Abhiyan and SFS. We are thankful to these survivors for finding the courage to share their traumatic experiences. Those who have spoken up are active in the united movement demanding the repeal of the three farm Acts, spearheaded by the mass organizations of farmers and agricultural laborers. And the named perpetrators include men who were active within the same progressive organisations and spaces.

We deeply mourn the tragic death of 25-year-old Momita Basu from Covid infection on April 30 in a hospital in Bahadurgarh. She had travelled to the Tikri border in Haryana with the Kisan Social Army who she met when they visited West Bengal. As close sources reveal, she was struggling to protect herself from the continuous harassment of its leading member. Instead of getting any justice, she had been asked to return back to Bengal. Perhaps there is a real paucity of mechanisms of redressal or lack of skills among the peasant unions.

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हिडमे मरकम की तत्काल रिहाई तथा बस्तर में आदिवासियों पर राज्य द्वारा किए जाने वाले अत्याचार को समाप्त किए जाने की अपील

प्रेस विज्ञप्ति

भारत के 20 से ज़्यादा राज्यों और दुनिया भर के 1,000 से ज़्यादा कार्यकर्ता, शिक्षाविद, सजग नागरिकों ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को लिखा

हिडमे मरकम की तत्काल रिहाई तथा बस्तर में आदिवासियों पर राज्य द्वारा किए जाने वाले अत्याचार को समाप्त किए जाने की अपील

21 अप्रैल, 2021: एक आदिवासी मानवाधिकार रक्षक और पर्यावरण कार्यकर्ता हिडमे मरकम की मनमाने तरीक़े से गिरफ़्तारी के 40 दिनों बाद एक हज़ार से अधिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, दुनिया भर के सजग नागरिकों ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल को एक याचिका भेजी है जिसमें हिडमे मरकम को तुरंत रिहा करने तथा छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के ख़िलाफ़ दमन के चक्र को समाप्त करने के लिए सक्रिय क़दम उठाने का आह्वान किया है। उन्होंने यह भी अपील की कि हिडमे और अन्य आदिवासी कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ लगाए गए झूठे आरोप हटाए जाएँ और यौन और राज्य हिंसा के सभी मामलों में स्वतंत्र जाँच की जाए। [पूरा पत्र और हस्ताक्षरकर्ताओं की पूरी सूची संलग्न है]

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Free Hidme Markam: 1000+ activists, academics, concerned citizens write to Chief Minister, Chhattisgarh

1,000 + activists, academics, concerned citizens from 20+ states in India and across the globe write to Chief Minister Chhattisgarh

Call for immediate release of Hidme Markam and end state excess on adivasis in Bastar 

21 Apr, 2021: Deeply outraged by the arbitrary incarceration of Hidme Markam, an adivasi human rights defender and environmental activist, for over 40 days, more than a thousand activists, academics, concerned citizens from across the globe sent a petition to Mr. Bhupesh Baghel, the Chief Minister, Chhattisgarh calling upon him to immediate ensure the release of Hidme Markam and take pro-active steps to end the cycle of repression against adivasis in Chhattisgarh. They also appealed that false charges against Hidme and other adivasi activists be dropped and an independent inquiry be conducted into all instances of sexual and state violence.

[The full text of the letter and full list of signatories available at the end]  

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Fiery Tales of Courage and Resilience: A Graphic Book by WSS

ANNOUNCING

Fiery Tales of Courage and Resilience /

फूल भी, चिंगारी भी: ताक़त और प्रतिरोध की कहानिया

A Graphic Book with 14 stories of strength based on fact-finding reports, solidarity visits, statements, and articles between 2015-2020. Available in English and Hindi

Click on the links below for a sneak -peak at the first chapters of the book:

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Print copies are OUT on April 14th!

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उन्नाव घटना की उच्च स्तरीय एवं स्वतंत्र न्यायिक जांच हो: दलित बालिकाओं और महिलाओं पर हिंसा अब और नहीं !

‘आदित्य राज’ में महिला विरोधी ‘कानून व्यवस्था’ निंदनीय! उत्तर प्रदेश सरकार इस्तीफा दे!  

उत्तर प्रदेश महिला और दलित उत्पीडन के मामले में सबसे आगे है, ये बात आंकड़े तो बता ही रहे है, आए दिन सामने आती घटनाएं भी इसकी मुनादी कर रही हैं कि उत्तर प्रदेश की सरकार इन्हें रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है। 17 फरवरी 2021 को फिर से उन्नाव जिले के बबुरहा गांव से दो नाबालिग दलित लड़कियों की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या की घटना सामने आई, एक तीसरी नाबालिग दलित लड़की मौत से जूझ रही है। WSS इन लगातार बढ़ती घटनाओं पर अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए, इस पूरी घटना की उच्च स्तरीय एवं स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग करता है, क्योंकि हाथरस मामले की तरह इस घटना में भी ‘साक्ष्य मिटाने’ और कुछ लोगों पर ‘दबाव डालने’ की बातें सामने आ रही है।

ताज़ा खबरों के अनुसार पुलिस ने 21 साल के विनय कुमार को इस अपराध में मुख्य दोषी ठहराते हुए, गिरफ्तार कर लिया गया हैं, और साथ में, एक और व्यक्ति को विनय की मदद करने के आरोप में, हिरासत में लिया गया है| पुलिस का कथन है कि विनय ने अपने प्यार ठुकराये जाने पर, यह अपराध किया | 17 फरवरी को उन्नाव के असोहा थाना क्षेत्र के बाबुरहा गांव, जो कि ब्राह्मण बहुल है, में एक दलित परिवार की तीन लड़कियां हमेशा की तरह दोपहर में चारा लेने निकली थीं. शाम को जब वह देर तक नहीं लौटीं तो उनके परिवारवाले चिंतित होके, उन्हें ढूंढ़ने निकले. देर रात वे अपने खेत में पड़ी हुई मिली, उनके मुंह से झाग निकल रहा था और हाथ-पाँव बंधे हुए थे । तीनों लड़कियों को कानपुर के हैलट अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां पहुँचते ही दो लड़कियों को मृत घोषित किया गया और तीसरी लड़की अभी एक गंभीर अवस्था में वेंटिलेटर पर है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण जहरीली पदार्थ का सेवन बताया गया है, किसी तरह के बाहरी और आंतरिक चोट का न होना बताया गया है, और उनके हाथ पैर बंधे होने की बात नहीं मानी गई है।

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