प्रधान मंत्री, श्री नरेंद्र मोदी के लिए खुला पत्र

प्रधान मंत्री, श्री नरेंद्र मोदी के लिए खुला पत्र
3 फ़रवरी, 2020

*भाजपा के लिए मतदान डालो, नहीं तो तुम्हारा बलात्कार होगा! क्या दिल्ली की औरतों के लिए यही आपका चुनावी सन्देश है?
आपकी पार्टी महिलाओं और बच्चों पर गोलियों का लक्ष्य बनाने के लिए भी भीड़ को प्रोत्साहित कर रही है
कृपया अपनी पार्टी को महिलाओं को हिंसा की धमकी देने से रोकें
आप संविधान की गरिमा को कायम रखते हुए चुनाव लड़ें।*

प्रधान मंत्री महोदय,
हम सभी आपको एकता के भाव से सम्बोधित कर रहीं हैं; हम भारत देश और दिल्ली की महिलाएं-हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, आदिवासी और दलित- महिलाओं के प्रति हिंसा के इस भयंकर वातावरण के लिए चिंतित हैं जो आपकी पार्टी के सदस्यों द्वारा केवल एक चुनाव जीतने के प्रयास के लिए बनाया जा रहा है.
• जब अनुराग ठाकुर, केंद्र सरकार के वर्तमान मंत्री भीड़ को ‘गोली मारो सालों को’ चिल्लाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, कृपया यह ध्यान में रखिए की यहाँ पर ‘सालों’ वह लाखों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी महिलाएं है जो कई शहरों के मैदानों में, उद्यानों में छोटे बच्चों को अपनी गोद में लिए बैठी हैं.
• आपकी पार्टी के एक और प्रचारक, उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री, अजय सिंह बिश्त उर्फ़ ‘योगी आदित्यनाथ’ ने दिल्ली में अपना प्रचार यह बोलके शुरू किया कि ‘बोली से नहीं तो गोली से मानेंगे!’
• जब माननीय गृह मंत्री श्री अमित शाह लोगों को यह बोलते हैं की 8 फ़रवरी को इतने ‘ज़ोर’ से इ.वी.एम बटन दबाओ की ‘प्रदर्शनकारियों को करंट महसूस हो’. क्या वो महिलाओं को करंट लगवाना चाहते हैं?
क्या भाजपा अब खुलेआम भारत की महिलाओं और बच्चों के जीवन को ख़तरे में डाल रही है? यह बात इतिहास में लिखी जाएगी और देश इसके लिए कभी आपको माफ़ी नहीं देगा, प्रधान मंत्री महोदय। देश ने आपकी पार्टी के सदस्यों द्वारा बनाया गया हिंसक माहौल और नफ़रत फैलाने का परिणाम प्रत्यक्ष रूप से देखा है; जिसने जामिया में मासूम छात्रों पर 30 जनवरी को गोली चलाने के लिए ‘राम भक्त’ गोपाल तथा एक और हथियार धारक आतंकवादी को 1 फ़रवरी, शाहीन बाग़ की महिलओं पर गोली चलाने के लिए प्रोत्साहित किया ।
• प्रवेश शर्मा, आपके पार्टी के संसदीय सदस्य कहते हैं -“लाखों लोग वहां (शाहीन बाग़) में इकठ्ठा होंते हैं. दिल्ली के लोगों को सोचना होगा और निर्णय लेना होगा. वो आपके घरों में घुसेंगे, आपकी बेटियों और बहनों का बलात्कार करेंगे, उन्हें मार दो.”
इस सरकार के सचिव होने के नाते यह किस तरह की सांप्रदायिक नफ़रत और डर के माहौल को आप बढ़ावा दे रहे हैं, जो सभी समुदायों की औरतों को असुरक्षित और डरा हुआ महसूस करा रही है? भाजपा के लिए मतदान डालो, नहीं तो तुम्हारा बलात्कार होगा! क्या दिल्ली की औरतों के लिए यही आपका चुनावी सन्देश है? क्या आपकी पार्टी का स्तर इतना निचे तक गिर चूका है?
औरतें बलात्कार का मतलब समझती हैं प्रधान मंत्री महोदय। हम बहुत लम्बे समय से अपने शरीर पर हिंसा सह रहीं है, आपकी सरकार के बेटी बचाओ! नारे के बावजूद हम में से कई औरतें न्याय के लिए बस इंतज़ार करती रही हैं. हमारे ऐतिहासिक दर्द और डर को घटिया/तुच्छ बांटनेवाली राजनीती के लिए इस्तेमाल किये जाने की हम भरपूर निंदा करती हैं.
हमें दिल्ली के शाहीन बाग़ों से डर नहीं लगता, प्रधान मंत्री महोदय। हम डरती हैं ऐसी सरकार से जो अपने सुरक्षा बल को शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों, औरतों और पुरुषों पर हमला करने का निर्देश देती है. निर्वाचित सदस्य जो की आम नागरिकों को खुली धमकी देते हैं. और पुलिस बल जो हाथ बांधे नफ़रत भरी बातों से उकसाये हिंसा करते लोगों को खड़ी देखती रहती है.
आपकी सरकार देश भर में एन.पी.आर, एन.आर.सी., सी.ए.ए के विरोध में चल रहे जन आंदोलन से असहमत हो सकती है. लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन हमारा संवैधानिक अधिकार है. और हम बस वही कर रही हैं. दिल्ली की लाखों औरतें सिर्फ़ इस आंदोलन का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि इसकी अगवाही कर रही हैं. सशक्त औरतें सामने आकर खड़ी हैं. अगर महिलओं के ऊपर आतंकवाद या ग़द्दारी का ठप्पा लगेगा तो हम चुप नहीं बैठेंगी, जबकि वो सिर्फ़ हमारे देश के संविधान की सुरक्षा और बचाव के लिए लड़ रहीं हैं.
प्रधान मंत्री महोदय, आप भाजपा के सदस्य हैं, लेकिन आप यह ना भूलें की आप इस देश के प्रधान मंत्री हैं और लोगों के अधिकारों की सुरक्षा करना आपका संवैधानिक कर्तव्य है. जब आपकी पार्टी के सदस्य भीड़ द्वारा हिंसा और गोली चालाने जैसी बातों का समर्थन करते हैं, और आप इस पर चुप्पी बनाये रखते हैं या इसका साथ देते हैं, तो वो आप हैं जो इसके ज़िम्मेदार है.
• आपको इन नियोजित हिंसा और नफ़रत भरे भाषणों के खिलाफ़ बोलने की आवश्यकता है.
• आपको तत्काल अपनी पार्टी के हिंसा भड़काने वाले सदस्यों के खिलाफ़ कार्रवाई करने की आवश्यकता है.
• आपको दिल्ली का चुनाव इस तरीके से लड़ने की ज़रूरत है जो हमारे संविधान की गरिमा को बनाये रखे और भारत की महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करता हो.

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