Monthly Archives: October 2020

बदनुमा गिरफ्तारी

यौन हिंसा तथा राज्य के दमन के विरुद्ध महिलाएं (डब्लूएसएस) फादर स्टैन स्वामि की गिरफ्तारी पर अंचभित है। फादर स्टैन स्वामि एक बुज़ुर्ग पादरी हैं जो पिछले पांच दशकों से आदिवासी मुद्दों पर काम करते रहे हैं। उन्हें 8 अक्टूबर, 2020 की रात में बदनाम भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद षडयंत्र प्रकरण में गिरफ्तार किया गया। एक सच्चे कार्यकर्ता और प्रतिष्ठित विद्वान की इस गिरफ्तारी की डब्लूएसएस भर्त्सना करता है और बताना चाहता है कि इस दयालु व विनम्र व्यक्ति के खिलाफ लगाए सारे आरोप हास्यास्पद हैं। हम बताना चाहते हैं कि 1 जनवरी, 2018 के दिन हुई भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच दरअसल देश के अग्रणि मानव अधिकार कार्यकर्ताओं को सताने का एक ज़रिया बन गई है। इस जांच के दौरान 15 अन्य वकीलों, कार्यकर्ताओं, लेखकों, कवियों, बुद्धिजीवियों को इसी तरह के बेतुके आरोपों में बंदी बनाया गया है। कुछ तो दो साल से भी अधिक अवधि के लिए कारागार में बंद रहे हैं।

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Arrest Most Foul – WSS Statement On The Arrest Of Father Stan Swamy

WSS is appalled at the arrest of Father Stan Swamy, an elderly Jesuit priest working on adivasi issues for the past 5 decades in the infamous Bhima Koregaon – Elgar Parishad conspiracy case on the night of 8 October, 2020. WSS condemns this most recent arrest of a sterling activist and a reputed authority, and calls out the sheer absurdity of charges against this kindly and gentle soul. We note that the investigation into Bhima Koregaon violence on 1st Jan 2018 has turned into a farcical witch-hunt against the leading human rights activists in the country, in which 15 other lawyers, activists, writers, poets, intellectuals and activists of renown have already been imprisoned under similarly ludicrous charges, some for over two years.

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हाथरस और बलरामपुर में दलित लड़कियों के साथ हुए बलात्कार और हाथरस के पूरे मामले पर WSS का बयान

बेटी बचाओ का नारा देने वाले बलात्कारियों को बचाने में लगे हैं!!

यौन हिंसा और राजकीय दमन के खिलाफ महिलाएँ (WSS)  उत्तर प्रदेश में महिलाओं पर बढ़ रही यौन हिंसा पर चिंता व्यक्त करती है। पिछले दिनों हाथरस और बलरामपुर में दलित लड़कियों के साथ हुए बलात्कार और हाथरस के पूरे मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन की लापरवाही और बलात्कारियों को फायदा पहुंचाने वाली कार्यवाही, जिसमें रातों रात पीड़िता के शव को जलाना भी शामिल है, की कड़े शब्दों में निंदा करते करते हैं। 

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