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Open Letter To Chief Justice, Andhra Pradesh High Court Regarding UAPA Charges On Mr. V. S. Krishna And Others

An Open Letter to

The Honourable Chief Justice,

Andhra Pradesh High Court

 4 December, 2020

We, as a group working towards achieving a safer and more just society for women, are writing this open letter to you in great dismay at some recent developments in Andhra Pradesh state.

As you are aware, the alleged gang-rape case of 11 adivasi women of the Kondh tribe by 13 men of AP Special Police personnel during a raid conducted in Vakapalli, has had a long legal history since August 2007, first in High Court of Andhra Pradesh and then in Supreme Court, and now in the SC/ST Special Court where it is in the final stages of hearing. After a decade-long chequered legal battle, the Supreme Court in 2017 ordered that the case be heard by an SC/ST Special Court. Whether the High Court or Supreme Court, the judiciary stood by the victims all these years and has helped to institute a special court for hearing the case.

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Police collusion with the perpetrators of rape and murder of a minor girl from the Nishad community (WSS Investigation Report)

आप बताना दीदी, मैं गलत बोल रही हूँ क्यागरीब की बेटी की इज्ज़त नहीं होती क्या!

“You tell me, sister, I am saying anything wrong … doesn’t the daughter of a poor person not have any not respect?”

We reached Gurmandi, about 10 km from the heart of New Delhi’s Connaught Place, at about 5.15 pm on 22 October, 2020. We were there to learn more about about the seventeen year old Dalit girl who was allegedly raped and murdered by her employer in Model Town on October 4. We turned into a narrow lane, and her house was upstairs, in a building at the end of the lane – just one room.

Her aunt, her mother’s younger sister, was settling the room after visitors had left, when we arrived. In the course of conversation, we discovered that she had not even had time to eat – she had returned from work and there were visitors, and we were there and she was trying to make us feel at home. This endless stream of visitors had become routine, since October 16. The girl’s older aunt lived not far away, and had also arrived to meet us.

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रेप-मर्डर केस में नाबालिग निषाद पीड़िता के साथ अन्याय, दोषियों का बचाव और पुलिस की साझेदारी – (WSS फैक्ट्फाइन्डिंग रिपोर्ट)

आप बताना दीदी, मैं गलत बोल रही हूँ क्यागरीब की बेटी की इज्ज़त नहीं होती क्या!

शाम के लगभग 5.15 पर हम गुड़मंडी में चौधरी चौक से होते हुए कुछ संकरी गलियों में घुसे। ऐसी ही एक गली में हम अंत के एक मक़ान में गए, सीढ़ियाँ चढ़ते ही उल्टे हाथ पर प्लास्टर किया हुआ एक कमरा था- मॉडल टाउन में काम करने वाली 17 साल की नाबालिग लड़की का, जिसका 4 अक्टूबर 2020 को कथित तौर पर बलात्कार और मर्डर हुआ है।

कमरे में उसकी छोटी मौसी थी, चूल्हे के पास खड़ी थी। और हमसे 3 मिनट पहले जो लोग मिलकर गए, उनके जाने पर कमरा सही कर रही थी, हमारे आते ही हमारी खातिरदारी में लग गई। बातों-बातों में पता चला कि उन्होनें सुबह से खाना भी नहीं खाया था, काम से लौट कर लोगों से बातचीत में ही लगी रह गई। 16 अक्टूबर से यह उनका रोज़ का रूटीन हो गया है। बड़ी मौसी, जो 3 गली छोड़ कर रहती हैं, वो भी वहीं आ गई थी।

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हाथरस और बलरामपुर में दलित लड़कियों के साथ हुए बलात्कार और हाथरस के पूरे मामले पर WSS का बयान

बेटी बचाओ का नारा देने वाले बलात्कारियों को बचाने में लगे हैं!!

यौन हिंसा और राजकीय दमन के खिलाफ महिलाएँ (WSS)  उत्तर प्रदेश में महिलाओं पर बढ़ रही यौन हिंसा पर चिंता व्यक्त करती है। पिछले दिनों हाथरस और बलरामपुर में दलित लड़कियों के साथ हुए बलात्कार और हाथरस के पूरे मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन की लापरवाही और बलात्कारियों को फायदा पहुंचाने वाली कार्यवाही, जिसमें रातों रात पीड़िता के शव को जलाना भी शामिल है, की कड़े शब्दों में निंदा करते करते हैं। 

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हैदराबाद और उन्‍नाव के बलात्कार और हत्याओं के खिलाफ WSS का बयान

हैदराबाद और उन्‍नाव के बलात्कार और हत्याओं के खिलाफ WSS का बयान

6 दिसम्बर 2019 को तेलंगाना पुलिस ने चार निहत्थे लौरी मज़दूर जिनकी उम्र 20 से 24 साल की थी को उस जगह अपनी गोलियों से मौत के घाट उतार दिया जहां उन्होंने कथित रूप से एक हफ्ता पहले एक 26 साल की महिला के साथ सामूहिक दुष्‍कर्म कर उसकी हत्या की थी। ठीक इसी दोपहर उन्‍नाव की एक 23 साल की महिला जो पिछले साल अपने साथ हुए सामूहिक बलात्कार के अ‍पराधियों की पहचान के लिये रायबरेली कोर्ट में गवाही के लिये जा रही थी। इन अभियुक्तों में से एक को गिरफ्तार किया जा चुका था परंतु ठीक जिस दिन कोर्ट में सुनवाई होनी थी उसके एक हफ्ते पहले ही वह जमानत पर छूट चुका था। यह लड़की उस दिन कोर्ट पहुंच ही नहीं सकी क्योंकि उसे रास्ते में ही पांच आदमियों ने ज़िंदा जला डाला। जिनमें से दो उसके बलात्कार के भी अभियुक्त थे। और उनमें से एक वही था जिसे कुछ दिनो पहले ही ज़मानत मिली थी। आग की लपटों से जलती हुई वह एक किलोमीटर का रास्ता तय करके अस्पताल पहुंची। उसका 90 फीसदी शरीर जल चुका था। दो दिन के भीतर ही उसने अपना दम तोड़ दिया। जिस समय उसकी मौत हुई ठीक उससे पहले हैदराबाद के लोग युवा पशुचिकित्सक के कथित चार बलात्कारियों की पुलिस कस्टडी मे हुई हत्या का यह कहकर जश्न मना रहे थे कि ‘न्याय’ हुआ है। Continue reading